पर्युषण पर्व महोत्सव

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पर्युषण पर्व महोत्सव

चुरू
साध्वी मंगलप्रभा जी के सान्‍निध्य में तेरापंथ भवन में पर्युषण महापर्व का आगाज हुआ। पर्व का अर्थ हैआनंद का अवतरण, पर्व का अर्थ है संस्कृति की साक्षात अवगति, पर्व का अर्थ है स्नेह एवं सौहार्द की दिशा में प्रस्थान करना। साध्वी प्रणवप्रभा जी ने उत्तराध्ययन सूत्र के आधार पर पर्युषण महापर्व की शुरुआत की। कन्या मंडल ने महावीर अष्टकम से मंगलाचरण किया। अन्‍नू बांठिया ने गीतिका प्रस्तुत की। कार्यक्रम का संचालन साध्वी समप्रभा जी ने पर्युषण में करणीय कार्यों की जानकारी देते हुए खाद्य संयम के बारे में बताया।
स्वाध्याय दिवस पर साध्वी मंगलप्रभा जी ने अपने उद्गार व्यक्‍त किए। साध्वी प्रणवप्रभा जी ने कहा कि मनुष्य जीवन दुर्लभ है। मनुष्य जीवन का सम्यक् लाभ कैसे उठाएँ। विषय पर अपना वक्‍तव्य दिया। साथ ही स्वाध्याय से क्या लाभ प्राप्त होते हैं, इस बारे में बताया। साध्वी समप्रभा जी ने संचालन करते हुए सभी को तपस्या के लिए प्रेरित किया।
सामायिक दिवस साध्वी मंगलप्रभा जी ने अभिनव सामायिक का प्रयोग करवाया।
वाणी संयम दिवस साध्वीश्री जी ने भगवान महावीर के तीसरे भव का वर्णन किया। साध्वी मंगलप्रभा जी ने सुखी जीवन का राज वाणी-संयम पर अपने उद्गार व्यक्‍त किए।
साध्वी समप्रभा जी ने कहानी के माध्यम से समझाया कि वाणी से बोया भी जा सकता है और खोया भी जा सकता है। साध्वी समप्रभा जी एवं साध्वी प्रणवप्रभा जी ने गीतिका प्रस्तुत की। इस अवसर पर नन्हीं बालिका तेजस्विनी द्वारा गीतिका की प्रस्तुति दी गई। कार्यक्रम का संचालन साध्वी समप्रभा जी ने किया।
अणुव्रत दिवस पर साध्वीवृंद ने अणुवत के महत्त्व पर प्रकाश डाला। इस अवसर पर साध्वीवृंद ने अणुवत पर गीतिका की प्रस्तुति दी।
जप दिवस पर साध्वीश्री ने अपना उद्बोधन दिया। साध्वी समप्रभा जी ने जप दिवस के उपलक्ष्य में जप कैसे व क्यों करना चाहिए तथा उसके फल के बारे में संक्षेप में बताया। साध्वी प्रणवप्रभा जी ने उत्तराध्ययन सूत्र के आधार पर बताया कि मनुष्य जीवन दुर्लभ है। कुमकुम जैन एवं रचना कोठारी द्वारा मंगलाचरण किया गया। कन्या मंडल की बहनों द्वारा गीतिका की प्रस्तुति दी गई। समण संस्कृति संकाय द्वारा मुन्‍नी कोठारी को आगम सहयोगी के रूप में मनोनीत किया गया। इस अवसर पर तेरापंथी सभा, महिला मंडल एवं कन्या मंडल सहित श्रावक समाज की अच्छी उपस्थिति रही। कार्यक्रम का संचालन साध्वी समप्रभा जी ने किया।
ध्यान दिवस इस अवसर पर साध्वीश्री जी ने उद्बोधन दिया। साध्वी प्रणवप्रभा जी ने ध्यान दिवस की उपयोगिता का वर्णन किया। कार्यक्रम का संचालन साध्वी समप्रभा जी ने किया।
संवत्सरी महापर्व पर साध्वी मंगलप्रभा जी ने कहा कि संवत्सरी महापर्व आत्मशुद्धि का पर्व है, इसलिए इसे महापर्व की उपमा दी गई है। उन्होंने संवत्सरी पर्व क्या, क्यों, कब और कैसे विषय पर आगम के आधार पर चर्चा की। साध्वीश्री जी ने कहा कि संवत्सरी आत्मशुद्धि का पर्व है।
इस अवसर पर तेरापंथी सभा, महिला मंडल, तेयुप, कन्या मंडल सहित श्रावक समाज की अच्छी उपस्थिति रही। महिला मंडल अध्यक्ष मुन्‍नी कोठारी ने आभार व्यक्‍त किया। सभा के मंत्री भरत कोठारी ने आगामी कार्यक्रमों की जानकारी दी। कार्यक्रम का संचालन साध्वी समप्रभा जी ने किया।