नमिऊण कल्प अनुष्ठान का आयोजन

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नमिऊण कल्प अनुष्ठान का आयोजन

रोहिणी, दिल्ली।
साध्वी डॉ0 कुंदनरेखा जी के सान्निध्य में एवं तेरापंथी सभा के तत्त्वावधान में शरद पूर्णिमा के प्रातःकालीन सत्र में ‘नमिऊण कल्प अनुष्ठान’ का वृहद कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम के प्रस्तुतकर्ता विख्यात वास्तु शास्त्री उमेद दुगड़ ने मंत्र की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि प्रत्येक अक्षर में शक्ति होती है। अक्षरों की सही संयोजना से मनवांछित फल प्राप्ति की जा सकती है। उन्होंने कहा कि मंत्र साधना से पूर्व आसन, मुद्रा और सुरक्षा कवच जरूरी होता है।
साध्वी कुंदनरेखा जी ने कहा कि बत्तीस आगमों में चंद्र प्रज्ञपती सूत्र/आगम की दूसरी गाथा-नमिऊण असुर सुर----बहुत प्रभावकारी मंत्र है। विघ्नहरण की ढाल में जयाचार्य ने भी ऐसा उल्लेख किया है, विघ्नहरण करने वाले मंत्र की साधना संभवतः आचार्य भिक्षु, जयाचार्य आदि तेरापंथ के प्रभावक सभी आचार्यों ने की होगी। यह मंत्र चेतना में चतुर्मुखी विकास का द्योतक है।
साध्वीश्री जी ने कहा कि श्रावक उमेद दुगड़ वास्तु शास्त्री के साथ-साथ धर्मसंघ के विशिष्ट श्रावक हैं, जो अपने कार्यक्रमों के माध्यम से धर्मसंघ और गुरुओं की प्रभावना करते हैं। उमेद दुगड़ ने ‘नमिऊण’ के प्रत्येक अक्षर का अलग-अलग संख्या में जप अनुष्ठान का आह्वान किया और साध्वी कुंदनरेखा जी आदि साध्वियों ने उनका जप कर जनता को प्रेरित किया। तेरापंथी सभा रोहिणी के अध्यक्ष विजय जैन ने कार्यक्रम की सराहना की और सभा की तरफ से आचार्यश्री महाश्रमण जी का फोटो, पुस्तक आदि के द्वारा उमेद दुगड़ का सम्मान किया। इस अवसर पर लगभग 125 लोगों की सहभागिता रही। रतनलाल जैन, अनिल जैन, सभा महामंत्री राजेंद्र सिंघी, उपाध्यक्ष सुरेंद्र जैन, चिराग जैन, पश्चिम विहार सभाध्यक्ष सुशील जैन आदि गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।