आध्यात्म जगत की महान विभूति थे आचार्यश्री महाप्रज्ञ

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आध्यात्म जगत की महान विभूति थे आचार्यश्री महाप्रज्ञ

जयपुर।
शासनश्री साध्वी कनकश्री जी ‘लाडनूं’ के सान्निध्य में आचार्यश्री महाप्रज्ञ जी की 103वीं जन्म जयंती विद्युतनगर स्थित नरपत-पुष्पा बैद के आवास पर मनाया गया। तेरापंथी सभा, जयपुर के तत्त्वावधान में आयोजित प्रज्ञा दिवस का शुभारंभ साध्वी मधुलेखा जी, साध्वी समितिप्रभा जी व साध्वी संस्कृतिप्रभाजी द्वारा प्रस्तुत ‘महाप्रज्ञ अष्टकम्’ के संगान से हुआ। बहुश्रुत साध्वी कनकश्रीजी ने कहा कि महाप्रज्ञ ज्योति के अवतार थे। अध्यात्म जगत की महान विभूति थे। उन्होंने धर्म व विज्ञान का समन्वय कर युग को नई दृष्टि प्रदान की तथा युवा पीढ़ी को विशेष प्रभावित किया। उसे धर्म व अध्यात्म की दिशा में आकृष्ट किया। वे आत्मलीन महायोगी थे। उन्होंने कठोर तपस्या और साधना से अंतः-प्रज्ञा को जगाया और उसे दिनोदिन अधिक निखारा। महाप्रज्ञ प्रज्ञा और पुरुषार्थ के प्रतिमान थे। साध्वीश्री जी ने अपने संस्मरणों के साथ आचार्यप्रवर के कर्तृत्व के अनेक पहलू उजागर किए।
साध्वी मधुलता जी ने आचार्यश्री महाप्रज्ञ की बाल्यावस्था के मधुर प्रसंगों का उल्लेख करते हुए कहा कि उनका जन्म खुले आकाश के नीचे और खुले भूतल पर हुआ था जो भविष्य में उनकी असीम संभावनाओं का द्योतक था। उन्होंने उपलब्धियों के अनेक कीर्तिमान स्थापित किए। साध्वी मधुलेखा जी ने कहा कि आचार्यश्री महाप्रज्ञ जी श्रद्धा एवं समर्पण के प्रतीक थे। गुरु तुलसी की हर कल्पना को साकार करते हुए उन्होंने तेरापंथ को विश्व क्षितिज पर पहुँचा दिया। साध्वी संस्कृतिप्रभाजी ने आचार्यश्री के विशाल रचना संसार का परिचय कराते हुए महाप्रज्ञ साहित्य के स्वाध्याय की विशेष प्रेरणा दी। साध्वीवृंद ने सुमधुर भावपूर्ण गीत का संगान कर वातावरण को संगीतमय बना दिया।
पुष्पा बैद व समस्त बैद परिवार ने शासन गौरव साध्वीश्री जी का अपने प्रांगण में स्वागत करते हुए सुमधुर गीत का संगान किया। सुशीला नखत ने आचार्यश्री के बहुआयामी व्यक्तित्व पर प्रकाश डालते हुए महाप्रज्ञश्री ने आध्यात्मिक, वैज्ञानिक व्यक्तित्वों के निर्माण की अद्भुत तकनीक प्रस्तुत की। युवा गायक संजू जैन ने गीतिका द्वारा आचार्यश्री की अभिवंदना की। साध्वी समितिप्रभा जी ने कार्यक्रम का संचालन किया।