अणुव्रत की प्रासंगिकता

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अणुव्रत की प्रासंगिकता

जयपुर।
अणुव्रत समिति, जयपुर द्वारा भिक्षु साधना केंद्र में टीपीएफ के साथ मिलकर तेरापंथ प्रोफेशनल्स के लिए अणुव्रत की प्रासंगिकता पर मुनि सुमति कुमार जी के सान्निध्य में, प्रस्तुत विषय पर कार्यक्रम किया। कार्यक्रम की शुरुआत नमोकार मंत्र के साथ हुई। मुनि राहुल जी ने गीतिका प्रस्तुत की। टीपीएफ, जयपुर के अध्यक्ष संदीप जैन ने सभी का स्वागत किया तथा अणुव्रत की प्रासंगिकता के बारे में बताया। छोटे-छोटे व्रतों की पालना से मनुष्य जीवन में काफी बदलाव लाया जा सकता है। मुनि देवार्य जी ने अणुव्रत का संक्षिप्त परिचय दिया।
मुनि सुमति कुमार जी ने कहा कि अणुव्रत का धर्म साधु और श्रावक दोनों का ही धर्म है। हमें विवेक को जागरूक रखते हुए अनावश्यक हिंसा से बचने का उपाय सोचना चाहिए। अंत में धन्यवाद ज्ञापन अणुव्रत समिति मंत्री डॉ0 जयश्री सिद्धा द्वारा किया गया। संदीप भंडारी तथा सिद्धा ने अणुव्रत प्रबोधन पुस्तक तथा प्रश्नावली मुनि सुमति कुमार जी को भेंट की। यह पुस्तक शासनमाता साध्वी कनकप्रभाश्री जी द्वारा रचित है। कार्यक्रम का संचालन डॉ0 अमित बैंगानी ने किया।