आचार्यश्री महाश्रमण जी का 49वाँ दीक्षा दिवस

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आचार्यश्री महाश्रमण जी का 49वाँ दीक्षा दिवस

भुवनेश्वर।
तेयुप द्वारा डॉ0 मुनि ज्ञानेंद्र कुमार जी एवं मुनि जिनेश कुमार जी के सान्निध्य में कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में तेरापंथी महासभा के अध्यक्ष मनसुखलाल सेठिया उपस्थित थे। इस अवसर पर डॉ0 मुनि ज्ञानेंद्र कुमार जी ने कहा कि जीवन वही काम्य है जो संयममय हो, असंयमी जीवन बंधन की ओर ले जाता है और संयमी जीवन मुक्ति की ओर। मुनि जिनेश कुमार जी ने इस अवसर पर कहा कि तीन प्रकार की आँखें होती हैंµचमड़े की, बुद्धि की व हृदय की। जब चमड़े की आँख खुली है तब उठना कहते हैं, जब बुद्धि की आँख खुलती है तब समझना कहते हैं और हृदय की आँख खुलती हैं तब जगना कहते हैं। जगने का नाम हैµदीक्षा। आचार्यश्री महाश्रमण जी ने मात्र 12 वर्ष की उम्र में दीक्षा स्वीकार की। आचार्यश्री महाश्रमण भारतीय ऋषि परंपरा के जीते जागते उदाहरण हैं।
मुनि कुणाल कुमार जी ने महाश्रमण अष्टकम् का संगान किया। मुनि कुणाल कुमार जी ने अपने विचार एवं मंगलभावना प्रकट की। ज्ञानशाला के बच्चों ने लघु नाटिका प्रस्तुत की। स्वागत वक्तव्य तेयुप अध्यक्ष विवेक बेताला ने दिया। इस अवसर पर तेरापंथी सभा अध्यक्ष बच्छराज बेताला, तेममं अध्यक्ष मधु गीड़िया, ललिता सुराणा आदि ने अपने विचार व्यक्त किए। आभार ज्ञापन संयोजक जितेंद्र ने किया।