अक्षय तृतीया आत्म जागृति का पर्व

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अक्षय तृतीया आत्म जागृति का पर्व

ईरोड।
साध्वी उज्ज्वलप्रभाजी की सन्निधि में अक्षय तृतीया का पारणा हुआ। कार्यक्रम की विशेष बात थी कि स्वयं साध्वी उज्ज्वलप्रभाजी एवं साध्वी सन्मतिप्रभाजी दोनों साध्वियों का दूसरा वर्षीतप सानंद संपन्न हुआ। लातुर से समागत शोभाबाई कोटेचा का पाँचवाँ वर्षीतप का पारणा था, कोयंबटूर से सरलाबाई बोहरा के प्रथम वर्षीतप का पारणा था। साध्वी उज्ज्वलप्रभाजी ने कहा कि अक्षय तृतीया का पर्व आत्म शक्ति को जागृत करने का पर्व है। भगवान आदिनाथ ने समग्रता का जीवन जीया और जनमानस को भी समग्रता का संदेश दिया। साध्वी अनुप्रेक्षाजी ने कहा कि दृढ़-संकल्पी व्यक्ति ही परिस्थितियों को अपने अनुरूप ढाल लेता है, साध्वी सन्मतिप्रभाजी ने कहा कि तपस्या से मन की पवित्रता बढ़ती है, वाणी में यथार्थ और काया में स्थिरता का विकास होता है।
कार्यक्रम का शुभारंभ ईरोड युवक परिषद के मंगल गीत से हुआ। सभा अध्यक्ष हीरालाल चोपड़ा ने स्वागत भाषण से सभी का स्वागत किया। मंजु बोथरा, ऋषभ नखत, ज्योति सुराणा, प्रेम सुराणा, प्रकाश जोगड़, मीठी जोगड़, सुशीला बाफना, निर्मल कोठारी, अलका भंडारी, रमेश पटावरी, आदि ने अपने विचार व्यक्त किए। ईरोड महिला मंडल द्वारा गीतिका की प्रस्तुति हुई। कार्यक्रम का संचालन साध्वी प्रबोधयशाजी ने किया। भावना और प्रेमलता ने गीत प्रस्तुत किया। तपस्वी बहनों को साहित्य एवं मोमेंटो द्वारा अभिनंदन किया गया। आभार दुलीचंद पारख ने किया।