साध्वी कमलप्रभा जी के प्रति आध्यात्मिक उद्गार

साध्वी कमलप्रभा जी के प्रति आध्यात्मिक उद्गार

जीवन सफल बणायो जी---

साध्वी समृद्धिप्रभा 

जीवन सफल बणायो जी-2
महाश्रमण री आज्ञा स्यूं थे अनशन ठायो जी॥

सतरह वर्षा री उमर म्है, घर परिवार ने छोड्यो।
58 वर्षां संयम पाल्यो, पायो रत्न अमोलो॥

गुरुवर तुलसी कर कमला स्यूं, संयम श्री स्वीकारी।
श्री कुशल, सुंदर री लाडली ने, जीवन नैयातारी॥

दस भायां री बहन लाडली, बैद परिवार नामी।
थांरे कुल रा 16 दीक्षित, घर जागी पुण्वानी॥

कमला स्यूं कमलप्रभा बठा, गाँव शहर थे बिचर्या।
प्रवचन री अद्भुत शैली स्यूं, गणवन में थे चमक्या॥

सहज सरलता सहनशीलता, कार्य कुशलता न्यारी।
प्रात: बेला श्रुत सामायिक, ध्यान साधना थांरी॥

शासनश्री रो अलंकरण, ग्यारवां गणि बकसायो।
गंगाणै रो मर्यादोत्सव, सब ने घणो सुहायो॥

तीव्र वेदनां में भी रहतो, हँसतो खिलतो चेहरो।
डॉक्टर सारा अचंभित रह्गया, देख मनोबल थारो॥

घणी उमंग ले जोधाणै स्यूं, वस्त्र-नगर में आया।
भावी आगे जोर न चाल्यो, गुरु दर्शन नहीं पाया॥

भीलवाड़े रा श्रावक सेवा, ध्यान घणो रखायो।
शासनश्री रे श्रम बूंदा स्यूं, गुरु चौमासो पायो॥

तीन-तीन गुरुवांरी किरपा, सौभागी थे पाई।
महाश्रमणीजी री स्नेहिल निजरां, रहती ज्यूं परछाई॥

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