रामनवमी के दिन की थी आचार्यश्री भिक्षु ने धर्म क्रांति

रामनवमी के दिन की थी आचार्यश्री भिक्षु ने धर्म क्रांति

बोरावड़।
आचार्यश्री भिक्षु की धर्म क्रांति की फलश्रुति हैµतेरापंथ। रामनवमी के दिन मेवाड़ की बगड़ी धरा पर आचार क्रांति करते हुए अपने गुरु का मोह त्याग कर सत्य मार्ग पर चल पड़े। यद्यपि इस क्रांति के विरोध में अनेक कष्टों का सामना करना पड़ा। जीवन की मूलभूत आवश्यकता है रोटी, कपड़ा और आवास के लिए मकान भी 5 वर्षों तक बराबर उपलब्ध नहीं हुए, किंतु वे बहुत आत्मबलि पुरुष थे। उन्होंने सारी परिस्थितियों को समता से सहन किया। ढाई सौ वर्ष पूर्व जिस तेरापंथ की स्थापना हुई आज वह न केवल भारतीय जनमानस का अपितु विश्व मानव का मार्गदर्शन कर रहा है। यह विचार मुनि चैतन्य कुमार ‘अमन’ ने भिक्षु अभिनिष्क्रमण दिवस पर पार्श्व मंदिर में धर्मसभा में व्यक्त किए।
इस अवसर पर मुनि चैतन्य कुमार ‘अमन’ ने कहा कि श्री राम का जीवन जैन, बौद्ध, सिक्ख, सनातन तक, यहाँ तक इस्लाम धर्म में भी आदर्श रूप में माना गया है। राम की वचन पालना की दृढ़ता, मातृ-पितृभक्ति, भ्रातृत्व भाव और प्रजा वत्सलता आज भी विख्यात हैं ऐसे महापुरुषों के आदर्शों को आत्मसात करना ही उनकी जयंती को मनाने की सार्थकता है।
मुनिश्री ने कहा कि मुनि सुबोध कुमार जी ने अनुष्ठान के दौरान जो भी कुछ सिखाया है उसे आगे बढ़ाने का प्रयास करना है, तभी संभागी बनने की सार्थकता हो सकेगी। मुनि सुबोध कुमार जी ने कहा कि बोरावड़ में यह जो अनुष्ठान हुआ है प्रथम बार ही हुआ। इस अनुष्ठान के द्वारा आपने जो पाया है, उसको आगे बढ़ाने का प्रयास करें। इस अवसर पर नगरपालिका अध्यक्ष भंवरलाल मेघवाल, तेयुप अध्यक्ष व वार्ड पार्षद गजेंद्र बोथरा, महिला मंडल मंत्री प्रवीणा बोथरा, स्वर्णकार संघ के अध्यक्ष विनय सोनी, तेयुप कार्यकर्ता कैलाश गेलड़ा, नेमीचंद्र गेलड़ा, अंकित चोरड़िया, दिव्या खटेड़, आभा गेलड़ा, श्रेया कोटेचा ने अनुष्ठान के अनुभव तथा विचार व्यक्त किए।