बिना व्रत के व्यक्ति का जीवन शून्य

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बिना व्रत के व्यक्ति का जीवन शून्य

नोखा।
मानव रत्न अनमोल हीरा मिला हैं मात्र भोग-विलास, ऐसो-आराम में व्यर्थ गँवाना मूर्खता है। सब कुछ होते हुए संयम रखना, व्रत रखना, विशेष बात है। बिना संकल्प वाले का जीवन शून्य होता है। पूर्व भव की कमाई खर्च कर रहे हैं। इस भव में सुकृत करणी करके व्रत अपनाकर जीवन में उज्ज्वलता लानी अपेक्षित है। यह उद्गार मुनि डॉ0 अमृत कुमार जी ने समझाते हुए बारह व्रत पर प्रकाश डाला।
मुनि उपसम कुमार जी ने कहा कि युवा अवस्था सबसे अधिक श्रम, परिश्रम और शक्ति संपन्न होती हैं मानव आत्म कल्याण में संलग्न रहे। माला, जप, ध्यान नित्य करें।