जो विनीत होता है, उसका विकास होता है। विनीत सुखी और अविनीत दु:खी होता है।

- आचार्य श्री भिक्षु

विविध

पाणिग्रहण संस्कार

पूर्वांचल-कोलकाता

10 Jan - 16 Jan 2022

पाणिग्रहण संस्कार

स्वाध्याय

साँसों का इकतारा

साध्वीप्रमुखा कनकप्रभा

10 Jan - 16 Jan 2022

साँसों का इकतारा

स्वाध्याय

संबोधि

आचार्य महाप्रज्ञ

10 Jan - 16 Jan 2022

संबोधि

स्वाध्याय

अवबोध

मंत्री मुनि सुमेरमल ‘लाडनूं’

10 Jan - 16 Jan 2022

अवबोध

स्वाध्याय

उपासना

आचार्य कुंदकुंद

10 Jan - 16 Jan 2022

उपासना
PDF जैन पंचांग